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Friday, 26 February 2016
आत्मविश्वास की पुंज हैं किताबें
Saturday, 20 February 2016
किताबों की दुनिया में ईकमर्स की पैठ
Monday, 15 February 2016
इंटरनेट युग में भी किताबों को न भूले
आज की दुनिया बड़ी ही तेज रफ्तार के साथ भाग रही है। संचार क्रांति ने ऐसी क्रांति ला दी है कि लोगों ने इसे ही अपना दोस्त बना लिया है। अपने दोस्तों से प्रिय संचार साधन मोबाइल हो गया है। जिस तरह पहले अगर एक दोस्त दूसरे दोस्त से न मिले तो बेचैन हो जाता था वैसे ही आज अगर आपको संचार सुविधा से वंचित कर दिया जाए तो आप भी वैसे ही बेचैन हो उठेंगे। संचार सुविधा बढ़ना एक अच्छी बात है। लेकिन इसके साथ सभी संबंधों का साधना अपके व्यक्तित्व को और महान बनाता है। सबंधों के जैसे आज के युग में लोगों से किताबों से भी ऐसे ही नाता टूटा है। कोई भी समस्या हो तुरंत मोबाइल उठाया और गूगल बाबा से पूछ लिया। यह बेहद ही सुलभ और लभगभ सही उत्तर पाने का साधन है। लेकिन अगर आप गंभीर और पूर्ण ज्ञान की तलाश में हैं तो यह आपको किताबें ही दे सकती है। इसमें कोई दो राय नहीं है। क्योंकि छिछले ज्ञान तो सर्वसुलभ और सर्वज्ञय है लेकिन अगर आपकों गंभीर ज्ञान की तलाश है तो वह किताबें ही दे सकती है। अतः वैसे किताबों की तलाश करें। वैसे इस तलाश में इंटरनेट आपकी भरपूर मदद कर सकता है। क्यों उसी गूगल बाबा पर बाइ बुक्स आॅनलाइन ( buy books online) सर्च कर अपने ज्ञान के भंडार को बढ़ा सकते हैं। इंटरनेट पर हजारों आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) है जो आपके चयन को और सुलभ बनाता है। आनलाइन बुक्स (online books) खरीदने का फायदा यह होता है कि आपकी पसंद की किताब आपके घर तक पहुंचती है। ऐसे ही आॅनलाइन बुक्स स्टोर में योरबुकस्टाल भी शामिल हैं जहां से आप बुक्स खरीद सकते हैं।Sunday, 14 February 2016
किताबों की दुनिया में खोया वह बचपन
किसी भी व्यक्ति का किताबों से संबंध उसकी बचपन को याद दिलाता है। किताबों की दुनिया में खोया वह बचपन जब आपको उस दौर में ले जाता है तो आप रोमांच से भर जाते हैं। चाहे वह क्लास की बुक्स हो या नंदन, चंपक, बालहंस या कोई काॅमिक्स, वह हमें उस फंतासी दुनिया में ले जाता था जहां हमें लगता था कि एक और दुनिया है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ फंतासी बातों से ही हम रूबरू होते थे। उस फंतासी कहानियों में बुराई पर अच्छाई की जीत, आचरण और संस्कार की सीख मिलती थी, जिसके कारण आज आप जहां हैं वहां एक सफल व्यक्ति हैं। उन किताबों ने हमें जीवन जीने की कला सीखायी, देशभक्ति, जिम्मेदारी और सेवा भाव का अनुभव कराया। इससे सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण हुआ। वैसे आज के परिपेक्ष्य में बात की जाए तो आज बच्चे किताबों की फंतासी दुनिया की जगह टीवी को दे दिया है। जहां उन्हें डोरेमोन, आॅगी-काॅकरोच, मोटू-पतलू और हड्डी-बड्डी जैसे सीरियल इंटरटेन करते हैं। यह बात अलग है कि अभिभावक उस पर ध्यान नहीं देते कि उसके भविष्य के लिए ठीक नहीं है। अभिभावकों को चाहिए की उन्हें अपने बच्चों को ऐसे किताबों (buy books online) से रूबरू

कराएं जो टीवी से ज्यादा इंटरटेन करें। इसके लिए आज आॅनलाइन बुक्स स्टोर्स (online bookstore) की भरमार है जो आपके बच्चों के लिए आॅनलाइन बुक्स (online books) उपलब्ध कराते हैं। अगर आप बाइ बुक्स आनलाइन करते हैं तो यह बुक्स आपके घर तक पहुंचाते हैं। ऐसे में आप अपने बच्चों को किताबों से दोस्ती करा सकते हैं।

कराएं जो टीवी से ज्यादा इंटरटेन करें। इसके लिए आज आॅनलाइन बुक्स स्टोर्स (online bookstore) की भरमार है जो आपके बच्चों के लिए आॅनलाइन बुक्स (online books) उपलब्ध कराते हैं। अगर आप बाइ बुक्स आनलाइन करते हैं तो यह बुक्स आपके घर तक पहुंचाते हैं। ऐसे में आप अपने बच्चों को किताबों से दोस्ती करा सकते हैं।
Saturday, 13 February 2016
अंधेरे पथ में लौ की समान है किताबें

Online Bookstores in India
Like all other countries of the world, online bookstores
have been the foundation stones of e-commerce in India, India’s ecommerce giant
flipkart also started off with online bookstore and later converted into a market
place where users can not only buy books online but can also buy other things.
Why books were the first items to be sold online?
Firstly one can buy books online easily without the tension
of the products getting broken or otherwise, the commodity books, are
comparatively easy to transport and ship.
Then the target buyers of books are normally educated
people, I hope this also as one of the major reasons that books were first
choice of the online buyers.
Because it was easier to convince the educated users of the
new technology and make them buy books online!
And, this phenomena must also have proved beneficial for the
brands, as the educated and learned customers also tend to be the leaders, the
lesser educated or unenlightened mass seems to follow them, as a consequence
all the first buyers would have made others also buy books online from the
online bookstores. Ultimately setting the platform for the e-commerce firm.
Anyways, when it comes to online bookstores in India and
their relevance or rather contribution, I personally am very grateful to them
for making available such a vast range of books. And now, I could buy books
online literally at a click of the mouse from these online bookstores.
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