आज इंटरनेट की छोटी दुनिया में हिन्दी साहित्य के लिए अच्छी खबर है और फिर से हम अपनी संस्कृति की ओर लौटने लगे हैं। जब तक हमारे संस्कृति में लिखने की परंपरा नहीं थी तब तक हम कहानियां लोगों की जुबानी सुनते थे। आज फिर से वह दौर शुरू होने वाला है। क्योंकि जीवन की आपाधापी, सिकुड़ते वक्त और किताबों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे की चर्चा के बीच इंटरनेट पर हिन्दी साहित्य की कालजयी और भूली बिसरी कृतियों को आडियो स्वरूप में डालकर प्रौद्योगिकी की मदद से किस्सागोई की नई पहल हो रही है। इनमें प्रेमचंद, चंद्रधरशर्मा गुलेरी, सुदर्शन से लेकर कमलेश्वर, स्वयं प्रकाश और आधुनिक कहानीकारों की रचनाएं शामिल हैं। इसे आॅडियों में पिरोने का काम भी एक साहित्यकार ने ही किया है। अमेरिका में रहने वाले अनुराग शर्मा स्वयं कहानीकार हैं और पिछले कुछ वर्षों से ऐसे ही प्रयासों में संलग्न हैं।Book Reviews, Latest Book Reviews, Book Release dates and everything that a booklover wants...
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Monday, 12 September 2016
हिन्दी की मशहूर कहानियां अब आॅडियो में भी
आज इंटरनेट की छोटी दुनिया में हिन्दी साहित्य के लिए अच्छी खबर है और फिर से हम अपनी संस्कृति की ओर लौटने लगे हैं। जब तक हमारे संस्कृति में लिखने की परंपरा नहीं थी तब तक हम कहानियां लोगों की जुबानी सुनते थे। आज फिर से वह दौर शुरू होने वाला है। क्योंकि जीवन की आपाधापी, सिकुड़ते वक्त और किताबों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे की चर्चा के बीच इंटरनेट पर हिन्दी साहित्य की कालजयी और भूली बिसरी कृतियों को आडियो स्वरूप में डालकर प्रौद्योगिकी की मदद से किस्सागोई की नई पहल हो रही है। इनमें प्रेमचंद, चंद्रधरशर्मा गुलेरी, सुदर्शन से लेकर कमलेश्वर, स्वयं प्रकाश और आधुनिक कहानीकारों की रचनाएं शामिल हैं। इसे आॅडियों में पिरोने का काम भी एक साहित्यकार ने ही किया है। अमेरिका में रहने वाले अनुराग शर्मा स्वयं कहानीकार हैं और पिछले कुछ वर्षों से ऐसे ही प्रयासों में संलग्न हैं।
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