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Friday, 29 April 2016

पांच साल में 100 अरब डॉलर का होगा ई-कॉमर्स कारोबार

भारत में ई-कॉमर्स कारोबार वर्ष 2020 तक छह गुणा बढ़कर 100 अरब डॉलर यानी 6 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच जाएगा। उद्योग संगठन सीआईआई ने बाजार अध्ययन कंपनी डिलॉयट के साथ मिलकर किए गए एक अध्ययन की रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2015 के अंत तक देश का ई-कॉमर्स कारोबार 16 अरब डॉलर का था। अगले पांच साल में 2020 के अंत तक यह 101.9 अरब डॉलर का हो जाएगा। उसने बताया कि इसकी सफलता के पीछे मुख्य कारण सतत नवाचार, प्रक्रियाओं को डिजिटलीकरण तथा स्मार्टफोनों, मोबाइल डिवाइसों तथा इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2013 में भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2.9 अरब डॉलर का था। साल 2014 में यह 13.6 अरब डॉलर तथा 2015 में 16 अरब डॉलर का हो गया। वर्ष 2018 में इसके 40.3 अरब डॉलर तथा 2020 में 101.9 अरब डॉलर का होने का अनुमान है। मध्यम वर्गीय ग्राहकों की संख्या 41 प्रतिशत बढ़ चुकी है तथा खरीददारी की आदतों में बदलाव के कारण आॅनलाइन खरीददारी करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस कारण कोई भी समान आॅनलाइन बुक (online books )कराने वाले और खरीददारों की संख्या 2013 के दो करोड़ से बढ़कर 2015 में तीन करोड़ 90 लाख पर पहुंच गई। एक क्लिक करते ही वैश्विक उत्पादों जैसे ऑनलाइन किताबें खरीदना (buy books online), मोबाइल बुक कराना सहित सुई से लेकर घर तक की उपलब्धता तथा सूदुर इलाकों में भी डिलिवरी की संभाव्यता के कारण वर्ष 2018 में इसके 14 करोड़ तथा 2020 में 22 करोड़ पर पहुंचने की उम्मीद है। देश के कुल मोबाइल उपभोक्ताओं में फिलहाल 11 प्रतिशत ही आॅनलाइन शॉपिंग करते हैं। इनका प्रतिशत 2018 में बढ़कर 25 पर तथा 2020 में 36 पर पहुंचने की उम्मीद है। संख्या के साथ-साथ प्रत्येक ग्राहक की खरीददारी की राशि भी बढ़ने की उम्मीद है। अभी जहां हर आॅनलाइन ग्राहक औसतन साल में 247 डॉलर की खरीददारी करता है, वहीं 18 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढ़ती हुई 2020 में उनकी खरीददारी बढ़कर 464 डॉलर सालाना हो जाएगी। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने भी शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि वर्ष 2023 तक दुकानों और मॉलों की चाहरदीवारी से होने वाला कारोबार अपने मौजूदा स्वरूप में समाप्त हो जाएगा और देश का ई-कॉमर्स बाजार बढ़कर 300 अरब डॉलर का हो जाएगा।

Saturday, 19 March 2016

हिन्दी के कालजयी लेखक और उनकी किताबें.....

भारत विविधताओं से भरा देश है। यहां की संस्कृति, परंपरा, बोली, भाषा कुछ ही दूरी पर बदल जाती है। यहां के लोग हजारों भषाओं में सवाद करते है, लेकिन संविधान के 22वीं अनुसूची में 22 भाषाओं को शामिल किया है। जिसमें देश की समृद्ध भाषाओं की सूची है। इसके बावजूद भारत में सर्वव्यापी भाषा हिन्दी है, जो पूरे देश भर में समझी और बोली जाती है। इस हिन्दी को और समृद्ध बनया है हिन्दी लेखकों ने जिनकी आज हम बात करने जा रहे हैं। आज हम हिन्दी के उन लेखकों के बारे में बात करेंगे जो स्वयं भारत के लाल थे और उनकी रचना कालजयी है, जिससे आज की नई पीढी प्रेरणा लेती है। आज इन लेखकोें की किताबें पढ़ने के लिए ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत नहीं। किसी भी आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) पर जाकर कोई भी आॅनलाइन किताब खरीद (buy books online) कर पढ़ सकते हैं।

प्रेमंचद - गोदान
प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य की बात की जाए तो प्रेमचंद का नाम सबसे पहले आता है। प्रेमचंद हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय साहित्याकोरोंम में से हैं और उनकी अनेक रचनाओं की गणना कालजयी साहित्य के अन्तर्गत की जाती है। ‘गोदान’ तो उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना तो है ही, ‘गबन’, ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’, ‘सेवा सदन’ तथा कहानियों में कफन, ईदगाह, दो बैलों की कथा आदि हिन्दी साहित्य का अमर अंग बन गई हैं। इनके अनुवाद भी भारत की सभी प्रमुख तथा अनेक विदेशी भाषाओं में हुए हैं। ‘गोदान’ प्रेमचन्द का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपन्यास है। इसमें ग्रामीण समाज के अतिरिक्त नगरों के समाज और उनकी समस्याओं का उन्होंने बहुत मार्मिक चित्रण किया है। उपन्यास में से कुछ....
‘होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी देकर अपनी स्त्री धनिया से कहा-गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूं। जरा मेरी लाठी दे दो।’

कामायनी-जयशंकर प्रसाद
जयशंकर प्रसाद भारत के उनक साहित्यकारों में रहे हैं जो इतिहासकार भी थे। उनके साहित्य में भारतीय इतिहास की हमेशा झलक मिलती है। जिस समय खड़ी बोली और आधुनिक हिन्दी साहित्य किशोरावस्था में पदार्पण कर रहे थे, तक काशी के ‘सुंघनी साहु’ के प्रसिद्ध घराने में जयशंकर प्रसाद जन्म हुआ। अगर प्रसाद की रचनाओं की बात की जाए तो उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना कमायनी है जो एक महाकाव्य है। यह आधुनिक छायावादी युग का सर्वोत्तम और प्रतिनिधि हिंदी महाकाव्य है। प्रसाद की यह अंतिम काव्य रचना 1936 ई. में प्रकाशित हुई, परंतु इसका प्रणयन प्रायरू 7-8 वर्ष पूर्व ही प्रारंभ हो गया था। इसके आलावा भी प्रसाद ने कई सर्वश्रेष्ठ रचनाएं दी जिसमें आँसू, झरना, कानन-कुसुम, लहर, शामिल हैं।

हरिवंश राय बच्चन - मधुशाला
हरिवंश राय श्रीवास्तव ‘बच्चन’ ‘हालावाद’ के प्रवर्तक बच्चन जी हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों मे से एक हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है। बच्चन जी की गिनती हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में होती है। अगर यह कहा जाए की उन्होंने साहित्य को आम लोगों के जुबां तक ल दिया तो यह अतिशोयोक्ति नहीं होगी। मधुशाला पहलीबार सन 1935 में प्रकाशित हुई थी। कवि सम्मेलनों में मधुशाला की रूबाइयों के पाठ से हरिवंश राय बच्चन को काफी प्रसिद्धि मिली। मधुशाला की हर रूबाई मधुशाला शब्द से समाप्त होती है। हरिवंश राय बच्चन ने मधु, मदिरा, हाला (शराब), साकी (शराब पड़ोसने वाली), प्याला (कप या ग्लास), मधुशाला और मदिरालय की मदद से जीवन की जटिलताओं के विश्लेषण का प्रयास किया है। मधुशाला जब पहलीबार प्रकाशित हुई तो शराब की प्रशंसा के लिए कई लोगों ने उनकी आलोचना की। बच्चन की आत्मकथा के अनुसार, महात्मा गांधी ने मधुशाला का पाठ सुनकर कहा कि मधुशाला की आलोचना ठीक नहीं है। मधुशाला के अलावा उन्होंने तेरा हार (1929), मधुशाला (1935), मधुबाला (1936), मधुकलश (1937), निशा निमंत्रण (1938), एकांत संगीत (1939), आकुल अंतर (1943), सतरंगिनी (1945), हलाहल (1946), बंगाल का काव्य (1946) जैसी सर्वश्रेष्ठ रचनाए भी दी।
मधुशाला की एक रूबाई...
मुसलमान और हिन्दू है दो, एक, मगर, उनका प्याला,
एक, मगर, उनका मदिरालय, एक, मगर, उनकी हाला,
दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद मन्दिर में जाते,
बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला!।

भीष्म साहनी-तमस
तमस भीष्म साहनी के साथ-साथ हिन्दी जगत की सबसे प्रसिद्ध रचना है। तमस की कथा परिधि में अप्रैल 1947 के समय में पंजाब के जिले को परिवेश के रूप में लिया गया है। तमस कुल पांच दिनों की कहानी को लेकर बुना गया उपन्यास है। परंतु कथा में जो प्रसंग संदर्भ और निष्कर्ष उभरते हैं, उससे यह पांच दिवस की कथा न होकर बीसवीं सदी के हिंदुस्तान के अब तक के लगभग सौ वर्षो की कथा हो जाती है। यों संपूर्ण कथावस्तु दो खंडों में विभाजित है। पहले खंड में कुल तेरह प्रकरण हैं। दूसरा खंड गांव पर केंद्रित है। श्तमसश् उपन्यास का रचनात्मक संगठन कलात्मक संधान की दृष्टि से प्रशंसनीय है। इसमें प्रयुक्त संवाद और नाटकीय तत्व प्रभावकारी हैं। भाषा हिन्दी, उर्दू, पंजाबी एवं अंग्रेजी के मिश्रित रूप वाली है। भाषायी अनुशासन कथ्य के प्रभाव को गहराता है। साथ ही कथ्य के अनुरूप वर्णनात्मक, मनोविशेषणात्मक एवं विशेषणात्मक शैली का प्रयोग सर्जक के शिल्प कौशल को उजागर करता है। तमस के अलावा भीष्म साहनी ने झरोखे, बसन्ती, मायादास की माडी, कुन्तो, नीलू निलिमा निलोफर जैसा रचना लोगों को दी

धर्मवीर भारती- गुनाहों का देवता
यह हिंदी उपन्यासकार भारत में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में से एक है। इसमें प्रेम के अव्यक्त और अलौकिक रूप का अन्यतम चित्रण है। इस उपन्यास के एक सौ से ज्यादा संस्करण छप चुके हैं। कहानी का नायक चंदर सुधा से प्रेम तो करता है, लेकिन सुधा के पापा के उस पर किए गए अहसान और व्यक्तित्व पर हावी उसके आदर्श कुछ ऐसा ताना-बाना बुनते हैं कि वह चाहते हुए भी कभी अपने मन की बात सुधा से नहीं कह पाता। सुधा की नजरों में वह देवता बने रहना चाहता है और होता भी यही है। सुधा से उसका नाता वैसा ही है, जैसा एक देवता और भक्त का होता है। प्रेम को लेकर चंदर का द्वंद्व उपन्यास के ज्यादातर हिस्से में बना रहता है। नतीजा यह होता है कि सुधा की शादी कहीं और हो जाती है और अंत में उसे दुनिया छोड़कर जाना पड़ता है। धर्मवीर भारती ने इसके अलावा भी सूरज का सातवां घोड़ा, ग्यारह सपनों का देश, प्रारंभ व समापन जैसा उपन्यास लिखा जो आज भी कालजयी है। वैसे गुनाहों के देवता की प्रसिद्ध पंक्तिया.....
1. छह बरस से साठ बरस तक की कौन-सी ऐसी स्त्री है, जो अपने रूप की प्रशंसा पर बेहोश न हो जाए।
2. अविश्वास आदमी की प्रवृत्ति को जितना बिगाड़ता है, विश्वास उतना ही बनाता है।
3. ऐसे अवसरों पर जब मनुष्य को गंभीरतम उत्तरदायित्व सौंपा जाता है, तब स्वभावतरू आदमी के चरित्र में एक विचित्र-सा निखार आ जाता है।
4. जब भावना और सौंदर्य के उपासक को बुद्धि और वास्तविकता की ठेस लगती है, तब वह सहसा कटुता और व्यंग्य से उबल उठता है।




Sunday, 13 March 2016

किताबों का शौक पालें...

चाहे आप किसी भी प्रवृति अथवा स्वाभाव के आदमी है, अगर आपको आगे बढ़ना है तो आपको किताबों का शौक पालना चाहिए। इस शौक से आपके ही नहीं आपके परिवार, आस-पास के लोग और पूरा समाज प्रभावित होगा। इसका सबसे पहले प्रभाव आपके परिवार और बच्चों पर पड़ेगा। क्योंकि अगर आपका बच्चा और घर के लोग आपको पढ़ते देखेंगे तो उन्हें भी पढ़ने की आदत पड़ेगी। क्योंकि आज के आधुनिक युग में बच्चे पढ़ने पर कम और टीवी-कंप्यूटर गेम पर अधिक ध्यान देते हैं। ऐसे में यह आपके पूरे परिवार के लिए लाभाकारी होगा। दूरा पारिवारिक फायदा यह होगा की किताबों के चयन और उसके विश्लेषण की माध्यम से आप अपने परिवार वालों को सही किताबों की चयन में मदद कर सकते हैं।
    अगर हम आस-पास के लोगों को लाभान्वित करने की बात करते हैं तो, किताबों के चिंतन-मनन से आपके पास ज्ञान के अकूत भंडार होंगे जो किताब नहीं पढ़ने वालों के पास नहीं होते। ऐसे में स्वभाविक है कि आपकी ज्ञान की प्रशंसा और चर्चा सभी जगह होगी। आज की किताबों से लेकर पुराने लेखकों की किताबों से आप रूबरू हुए रहते हैं। ऐसे में यह कहना बेमानी नहीं होगी कि आपसे आस-पास के लोग लाभान्वित नहीं होंगे। आपकी जानकारी एवं अन्य ज्ञानों से आस-पास लोग स्वभाविक रूप से प्रभावित एवं लाभान्वित होंगे। अगर हम सामाज की बात करें तो जिस जगह आप उपस्थित रहेंगे वहां आपकी पुछ होगी। क्योंकि अगर आप समाजिक है तो यह सबको मालूम रहता है कि आप क्या हैं। ऐसे में लोग आपसे लाभ लेने की भरपूर कोशि करेंगे।
    इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आप कहां से अपडेट और सर्वज्ञय हो सकते हैं, तो इसका सीधा से उत्तर है इंटरनेट। आज इंटरनेट के माध्यम से आप बेहद अपडेट रह सकते हैं और ऐसे में आपने किताबों का शौक पाल रखा है तो इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइटें (website) है जो आपको बेहद सस्ती किमतों में किताबें आॅनलाइन बुक्स (online books) उपलब्ध कराती हैं। ऐसे ही वेबसाइटों में योरबुकस्टाॅल भी शामिल है जहां आप सस्ती किताबें खरीद (buy books online)सकते हैं। तो आप भी पाल रहे हैं न किंताबों का शौक।....
   

Tuesday, 8 March 2016

स्मार्ट आॅनलाइन शॉपिंग ऐसे करें...

इंटरनेट दुनिया भर के लोगों के लिए ऐसी सौगात है जिसने सबकुछ बदल कर रख दिया है। इंटरनेट आपकी जिन्दगी में ऐसे समाई है जैसे वो आपकी साया हो। इसी इंटरनेट ने पिछले कुछ दशकों में शॉपिंग का अंदाज पूरी तरह बदल गया है। मॉल्स, ब्रांडेड बुक्स स्टोर्स (online bookstore) तथा हाइ काउंटर आउटलेट्स भरे पड़े हैं। जहां से आप आॅनलाइन शॉपिंग कर सकते हैं। चाहे वह किताबें  हो या अन्य कोई समान सब उपलब्ध है, लेकिन सुरक्षित शॉपिंग के लिए कुछ टिप्स आपके  लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन टिप्स से आप सुरक्षित आॅनलाइन शॉपिंग कर सकते हैं।

क्रेडिट और डेबिड कार्ड यूज करें
क्रेडिट और डेबिड कार्ड यूज करने के पीछे बस सिक्योरिटी और लिक्विडिटी कारण है। वैसे डेबिट कार्ड से शॉपिंग करते हुए यह पूरी तरह आपके अकाउंट से कटता है लेकिन क्रेडिट कार्ड से आॅर्डर करने पर पर बाद में उसे कैंसल करने कैश वापस के लिए पर आपको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती। क्रेडिट कंपनीज उसे वापस ले लेती हैं।

पर्सनल सिस्टम के साथ सिक्योर ब्राउजर
अपना शॉपिंग हमेशा नए खोले ब्राउजर विंडो में करें। इस तरह आपका आॅनलाइन ट्रांजैक्श्न ज्यादा सुरक्षित रहता है। साथ ही सार्वजनिक कम्प्यूटर या फिर अपने दोस्त का मोबाइल इस्तेमाल ना करें। ऐसा करने पर हमारी जानकारी लीक होने का भय बना रहता है।

सिक्योर वेबसाइट की जांच कर लें
आॅनलाइन शॉपिंग के लिए सबसे पहले तो ये ध्यान रखें कि जिस भी वेबसाइट से आप खरीदारी करें उसके एड्रेस में http नहीं, बल्कि https हो। 's' जुड़ जाने के बाद सिक्योरिटी की गारंटी हो जाती है और वो फेक साइट नहीं होगी। कभी-कभी 's' वेबसाइट में तब जुड़ता है जब आॅनलाइन पेमेंट का समय आता है। फिर ये चेक करें कि जहां से आप सामान खरीद रहे हैं क्या उसका पता, फोन नंबर और ईमेल एड्रेस वेबसाइट पर लिखा है?

आॅफर्स के साथ कूपन्स, प्राइस अपडेट्स का रखें ध्यान
स्मार्ट आॅनलाइन शॉपिंग के लिए बहुत जरूरी है कि आप दूसरे वेबसाइट्स पर चल रहे आॅफर्स को भी देखते रहें और कई वेबसाइट्स बाय बुक्स ऑनलाइन (buy books online) के साथ कई आॅफर्स की तुलना करते हुए बेस्ट डील करें। आॅनलाइन शॉपिंग में बेस्ट डील करने के लिए आपको कई बातों का खयाल रखना पड़ेगा। यह सिर्फ प्रोडक्ट की अभी की कीमत पर आधारित नहीं होता बल्कि उसपर घटने-बढ़ने वाली कीमत पर भी तय होता है। कूपन्स, डिस्काउंट कोद्स को इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

Monday, 7 March 2016

जिन्दगी से रूबरू करती हैं किताबें


अगर आप वास्तव में जिन्दगी से रूबरू होना चाहते हैं तो खूब किताबें पढि़ए। यह किताबें आपको जिन्दगी की वस्तविकता से रूबरू कराएगी। किताबे आपको उस कल्पना की बिंदू तक पहुंचाती है जहां की कल्पना आपने कभी नहीं करते। किताबों की दुनिया में अगर आप आते हैं तो आपको कभी भी निराशा हाथ नहीं लगेगी। अपको हमेशा जिन्दगी जीने की प्रेरणा और प्रोत्साहन मिलेगी। जिन्दगी के उतार-चढ़ाव और मुश्किलों से निकालने में किताबें हमेशा मदद करती है। कई ऐसे सफल लोगों की कहानी की शुरुआत किताबों से हुई जिन्हें आज के युवा उन्हें आदर्श मानते हैं। ऐसे सफल लोगों का साफ मानना और कहना है कि किताबों ने हमें इस स्तर तक पहुंचाया। ऐसा नहीं है कि उन्होंने सिर्फ किताब पढ़कर ही सफलता हासिल कर ली हो, लेकिन यह तय है कि उनके मेहनत और जुनून में किताबों की भागीदारी अहम रही है। अगर आपको भी एक सफल आदमी बनना है तो किताबों को अपने साथ रखें और खूब पढ़ें।
                लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि ऐसे किताबों को लाएं कहा से, ऐसी किताबें मिलेंगी कहां। इन सभी सवालों का जवाब है आॅनलाइन बुक स्टोर। आज के समय में इंटरनेट पर तमाम आॅनलाइन बुक्सस्टोर (online bookstore) उपलब्ध है जहां से आप मनचाही किताब भारी डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं। इन वेबसाइटों में एक साइट योरबुकस्टाॅल  भी जहां पर लाखों ऐसी बुक्स (books) उपलब्ध हैं। यहां बाइ बुक्स आॅनलाइन (buy books online) बड़े डिस्काउंट्स पर किताबें खरीद सकते हैं। यहां तमाम आॅनलाइन बुक्स (online books)उपलब्ध है।

Friday, 26 February 2016

आत्मविश्वास की पुंज हैं किताबें

हमें कोई भी काम करने के लिए आत्मविश्वास की जरूरत होती है। इसके कई स्रोत भी होते हैं जो हमें आत्मबल और आत्मविश्वास देते हैं। इसमें हमारे माता-पिता, भाई-बहन और अन्य सगे संबंधी के साथ वह महान व्यक्ति भी शामिल होता है जिसके बारे में हमने कहानी या अपने शिक्षक के माध्यम से पढ़े या सुने रहते हैं। वह हमें आगे बढ़ने एवं अच्छे काम के लिए प्रेरणा देते हैं। यह तो उस अवस्था कि बात हो गई जब हम बड़े बुजुर्गों की देख रेख में अपने आप को संवारते हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी आता है कि आप अकेले होते और आपको गाइड करने वाला कोई नहीं होता और आपमें आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। ऐसे में क्या करना चाहिए आपको सुझता नहीं है। यह वक्त ऐसा होता है जो आपको निराशा से भर देता है। ऐसे में विशषज्ञों की राय है कि आपको ऐसे किताबों को पढ़ना चाहिए जो आपको आत्मबल प्रदान करें और आपकों निराशा से निकाले। वैसे आज के दौर में किताबों का चयन और भी आसान हो गया है। आज तमाम आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) उपलब्ध हैं जहां से आप ऐसे किताबों का चयन कर सकते हैं जो आपको आत्मविश्वास से भर दे। इसके लिए आप बाइ बुक्स आॅनलाइन (buy books online) भी कर सकते हैं। कई ऐसी वेेबसाइटें है जो आपको इस मामले में मदद भी करती हैं। आॅनलाइन बुक्स (books online ) के लिए आप योरबुकस्टाॅल (yourbookstall.com) पर भी सर्च कर सकते हैं। बाइ बुक्स आॅनलाइन  (buy books online)के लिए आज कई बुक्स स्टोर पर आज लाखों बुक्स उपलब्ध हैं जो अपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं।

Thursday, 25 February 2016

आॅनलाइन किताबों की दुनिया...

आज दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है जिसका भान हमें कुछ साल पहले तक नहीं था। इतनी रफ्तार की सबकुछ बेहद नजदीक लगता है और पुरानी कहावत की दुनिया गोल है चरितार्थ लगने लगी है। यह सब हुआ है सूचना क्रांति से जो हमें एक दूसरे को बेहद करीब ला दिया है। इस कड़ी में इंटरनेट ने तो पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया। दुनिया कस सब कुछ रियल टाइम हो गया है। कोई भी सूचना, घटना और समाचार इतनी तेजी से फैलती है कि ग्रामीण अंचलों में तक पहुंचने में टाइम नहीं लगता है। अगर हम किताबों की बात करें तो ई कमर्स की शुरुआत ही किताबों से ही हुई और पूरी तरह मार्केट प्लेस बन गई। अगर आॅनलाइन बुक्स (online books) की बात करें तो इंटनेट पर करोड़ों किताबें उपलब्ध हैं। इसमें तो लाखों फ्री ईबुक्स जिसे असानी से डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं। इंटरनेट पर कई ऐसी प्रतिष्ठित वेबसाइट है जो आपको आनलाइन बुक्स (online books) भी उपलब्ध कराती हैं। इन वेबसाइटों पर बाइ बुक्स आॅनलाइन (buy books online) फिजकल और ई-बुक्स दोनों ही उपलब्ध हैं। आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) की दुनिया से सबसे ज्यादा पाठकों को फायदा हुआ है। एक ओर जहां पाठक अपनी पसंद के अनुसार किताबों का चयन कर आॅनलाइन बुक्स (online books) खरीद सकता है, वहीं दूसरी ओर फ्री ईबुक्स का लाभ भी उठा सकता है। वैसे लेखकों को भी अच्छी पहुंच पाठकों तक बनीं है। ऐसे में आॅनलाइन बुक्स (online books)की दुनिया बहुत ही बड़ी हो गई जिसका लाभ सभी को उठाना चाहिए।

Tuesday, 23 February 2016

सफल बनाती हैं किताबें.....

किसी के भी सफल जीवन के पीछे अगर आप झांकेंगे तो उस आदमी की सफलता के पीछे किताबों (books) की अहम भूमिका होती है। उसके व्यक्तित्व से लेकर उसके करियर के अयाम तक वह अपने आप को किताबों से जोड़े रखा है। उसकी सफलता का यही कारण होता है। अगर आपको भी सफलता की राह पर चलना है तो आज से ही किताबों (books) से नाता जोड़ लीजिए। आपके जीवन से करियर तक सब बेहतर हो जाएंगे। किताबों से नाता जोड़ने का यह मंतव्य बिल्कुल ही नहीं है कि सिर्फ आपने किताब पढ़ ली तो सबकुछ ठीक हो जाएगा। किताबों से जुड़ने का एक मतलब साफ है कि अच्छी किताबों को तो पढ़े ही उसमें दिए गए अच्छी बातों को चरित्र में उतारें। इससे आपका दोगुना विकास होगा। थोड़ी सी कठिनाई तो आएगी लेकिन आपके भविष्य के लिए यह बेहतर होगा। वैसे अच्छी किताबों के चयन के लिए आपको अब ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत भी नहीं है, क्योंकि आज इंटरनेट पर कई आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) उपलब्ध है जो आपके इस काम में मदद कर सकती हैं। इन वेबसाइटों पर जाकर आप बाइ बुक्स आॅनलाइन (buy books online) मनपसंद की बुक्स खरीद सकते हैं। ऐसे वेबसाइटें आॅनलाइन बुक्स (online books )रेकोमेंड भी करते हैं। आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) में कई कोटेगरी के बुक्स उपलब्ध होतें हैं। अगर आपको मालूम है कि कौन सी किताब आपको चाहिए तो आप किताबों को आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) में सर्च भी कर सकते हैं। आॅनलाइन बुक्स (online books) में कई सुविधाएं भी कंपनियां उपलब्ध करा रही हैं। जो होम डिलीवरी के साथ कैश आॅन डिलीवरी की भी सेवा उपलब्ध कराते हैं। ऐसे आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) से आप अपनी मनपसंद की किताबें बाइ बुक्स आॅनलाइन (buy books online) कर सकते हैं। अतः अच्छी किताबें (books) पढिए, उसको गुणिए और अपने जीवन को सफल बनाएं।

How to find the best online bookstore?



Yes, it’s true that the increasing number of onlinebookstores have made the availability of books easy and are contributing to the ease of the readers.
But with the number of online books and bookstores going up day by day is leading to a great confusion for the readers when they think to buy books online, as to which online bookstore they should go for.
Because most of them have books on same prices! Some may have very low prices but then there is a great danger of quality and delivery time with these online bookstores.
But there are several other parameters to find out the best online bookstore that too, before you buy books online.
First go for the collection. Yes, a large collection of online books and that too, barring just the popular ones is a great symbol of the seriousness of the online bookstore. It shows how determined they are about the various section of readers.
Secondly go to their Facebook pages, check out how many posts they make, when was their last post, what is the reaction from the people about their services. The main objective here, is to find out whether the online bookstore is active on its Facebook page or not, if its active, chances of quick response in case of any wrong book delivery are more.
Again before you buy books online also check the twitter and google plus pages of the bookstore, you can also check the online books collections of the bookstore on google plus. The more active an online bookstore is, the more are chances that its good.
Check out their delivery time, you can also call at the customer care numbers and can also drop a mail given on the website, their response handling will tell a lot about their trustworthiness.
Once you are satisfied, go ahead and buy books online!
Happy Reading!

Monday, 22 February 2016

पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ाएं किताबें

वैसे सभी को यह ज्ञात है कि किताबें न तो कभी पुरानी होती है और न तो वह कभी बेकार होती है। इसलिए किताबें (books) अनमोल होती हैं। ऐसे में या तो उस किताब को पढ़ने के लिए अपने इष्ट-मित्रों को प्रेरित कर सकते हैं या किसी ऐसे वंचितों को दान दे सकते हैं जो किताबों का शौकिन हो। ऐसे में एक तो किताब की उपयोगिता बरकरार रहेगी और दूसरी आपके जैसा कोई वंचित भी अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। दूसरी व्यवस्था यह है कि उस किताब को आप आॅनलाइन बुक्स बेंच भी सकते हैं। इसके लिए आॅनलाइन (online books) कई वेबसाइट उपलब्ध है जो ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। इन वेबसाइटों पर आप अपनी किताबें वंचितों के लिए फ्री या बेहद कम दामों पर बेच सकते हैं। ऐसी ही वेबसाइटों में योरबुकस्टालडाॅटकाॅम  जैसे साइटें है जो आपके परमार्थ में मदद कर सकती है। यहां आप बाइबुक्स आॅनलाइन (buy books online) भी अपनी पसंदीदा किताबें खरीद सकते हैं। यहां पर हजारों किताबें बड़ी डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं। अगर आपको ऐसा परमार्थ करना है और अपनी अच्छी किताबें वंचितों तक पहुंचाना है तो आप इन वेबसाइटों (online bookstore) का विजिट कर सकते हैं।

Sunday, 21 February 2016

5 Easy Steps To Find Your Books’ Worth

In this era of online bookstores and huge bombardment of information aimed at pushing sales of the books, almost every author (especially those with their first book) are too confused about their own book.
It seems really scary to think what if my book fails to draw attention of readers, what if no one understands what I wanted to say, etc etc.
But trust me, thousands of authors getting their books published every day, this confusion is natural. Have you heart hold back and follow the following five steps.
Before publishing your books online:

1.READ YOUR BOOK AS A READER: For this you first need to come out of your book’s frame. It is natural for an author to get involved into his/her book, but just shut the book off. Put it aside and forget about it for few days may be a week. Get engaged in other activities. Once you feel refreshed and out of the books frame. Sit down and start reading it. I am sure majority of your apprehensions will be solved.

2. ASK YOUR LESSER CLOSE ACQUAINTANCES TO READ THE BOOK: Yes, once you have read it as a reader send it to some of your acquaintances to read. But be very clear in not sending it to pretty close ones, and send it to diversified list of people. Because, from the close ones there are chances that you get prejudiced reviews and it should come from diversified group of people because readers are like that.

3. READ AGAIN: Yes, once you get the reviews and find some to be worthy of adopting please think and go ahead do it. Once you are done, run an edit for typos, sentence framing etc. Once you are ready with your new manuscript again keep it aside and try to come out of its frame and re read it. Yes, you will find a lot of things that you missed correct it. By this time I hope you have got half of your answer.

4. NICHE CHECKING: Now after you are ready. Browse online bookstores, check out the books of the genre in which you suppose your book to be. Buy books online and read them (atleast a couple of them). While reading you will automatically compare it with your book as they both belong to the same genre. It will also give you a feel of the book. This step could be taken during initial stages too, but again there is a danger of too much influence of the books on your own writing. Like others you have an independent style of writing, just try to hold the nerve of readers, don’t let it impact your story’s basics.

5. LITMUS TEST: Now that you are ready with your book, upload it for sales on various online bookstores where you can publish your book for free and readers can buy books online after you upload them. The response from the readers will answer rest all your questions. One more thing do try to connect directly and get the views of the readers personally.

BEST OF LUCK!!
Happy Reading & Writing!

माता-पिता के बाद तीसरा गुरु है किताबें

कहा जाता है कि किसी भी व्यक्ति का पहला गुरु माता-पिता होता है और इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए है। मां वह गुरु होती है जो एक बच्चे का व्यक्तित्व को निखारने और बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और पिता वह गुरु होता है जो मां की बनाई व्यक्तित्व को तराशकर निखारता है। ऐसे में उस बच्चे का व्यक्तित्व का निर्माण होता और वह समाज में एक सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार होता है। इस दरम्यान जो तीसरे गुरु की भूमिका निभाता है वह किताबें होती हैं। क्योंकि एक बच्चे के व्यक्तित्व के निर्माण में माता-पिता के साथ किताब की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। किताबों से ही बच्चे का माता-पिता अपने बच्चे को एक आदर्श नागरिक बानाने का प्रयास करता है। यह तो तब की स्थिति होती है जब बच्चा बच्चा होता है। लेकिन किशोरावस्था में प्रवेश के बाद बच्चे के लिए किताब सबसे ज्यादा महत्पूर्ण हो जाती है। यहां भी मां-बाप की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि बच्चा स्कूल बुक्स के अलावा क्या पढ़ रहा है या उसे क्या पढ़ना चाहिए? यह गाइड करना भी महत्वपूर्ण है। माता-पिता को भी यह ज्ञान होना चाहिए कि बच्चे को कैसे अच्छी किताबें सर्वसुलभ हो। वैसे आज-कल तो हर जगह सर्वसुलभता है। अगर आपको कोई किताब खरीदनी है तो आप किसी भी आॅनलाइन बुक स्टोर (online bookstore) से आॅनलाइन बुक्स (online books) खरीद सकते हैं। अगर आप बाइ बुक्स आॅनलाइन (buy books online) करते है तो आपका चयन आपके बच्चे के लिए अच्छा होना चाहिए। उसके लिए वह किताब रोचक हो और उसके पढ़ने में वह आनंद उठा सके। ऐसा मानना है कि आॅनलाइन बुक्स (online books) खरीदते समय बच्चों की भी राय लेना ज्यादा वाजिब होगा। क्योंकि यह भी हो सकता है कि जो किताब आप आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) से खरीद रहे हैं, वह आपके बच्चे को पसंद न हो। ऐसे में यह बेहतर होगा कि आप बाइ बुक्स आनलाइन (buy books online )करते समय बच्चे की राय जरूर लें।

Saturday, 20 February 2016

किताबों की दुनिया में ईकमर्स की पैठ

किताबों (books) की दुनिया एक अलग होती है और इस दुनिया के लोग समाज को अलग दिशा देता हैै। इस दुनिया के लोग अपनी दुनिया में खोए रहते हैं। इन्हें जो अच्छा लगता है वहीं करते हैं, वह किसी की नहीं सुनते। हम इन्हें बुद्धिजीवी वर्ग कह सकते है, जो किताबों के ज्ञान से बहुत ही परिपूर्ण होता हैं और उस ज्ञान की पुंज से एक अलग रोशनी निकलती है। ऐसे नहीं है कि इन वर्गों के अलावा कोई किताब (books) नहीं पढ़ता या वह समाज को नई दिशा नहीं देेता। समाज में सभी का योगदान अहम होता है चाहे वह ज्यादा हो या कम। इन सबों के बीच किताबों की दुनिया में किताब पहुंचाने कि सुविधा में इजाफा हुआ है। पहले हमें अपनी मन पसंदीदा किताब को खरीदने के लिए बुक्स स्टोर के चक्कर काटने पड़ते थे इसके बावजूद भी हमें किताब नहीं मिलती थी। लेकिन आज के संचार क्रांति के दौर में यह आपके घर पर आपकी पसंदीदा बुक्स उपलब्ध हो जाएंगी। इंटरनेट पर आज कई आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore)  हैं जहां से आप किताबें खरीद सकते हैं। यह बेहतर आॅप्शन भी उपलब्ध कराते हैं। बाई बुक्स आॅनलाइन (buy books online) से एक तो अपको अपनी पसंदीदा बुक्स (books) मिल जाती है वहीं दूसरी ओर कई आॅफर्स एवं डिस्काउंट भी मिलते हैं। आनलाइन बुक्स (online books) खरीदना भी असान है और किताब आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online book store) वाले आपके घर तक भी पहुंचा के जाते हैं। अगर आपको उस किताब में कोई कमियां नजर आती हैं तो आप उसे वापस करके दूसरी किताब भी मंगवा सकते हैं। एक तरह से यह कहा जाए कि आज किताबों की दुनिया में (buy books online) ईकमर्स ने पैठ बना ली है तो अतिशोयक्ति नहीं होगी।

Friday, 19 February 2016

A Complete Guide To Find Your Ideal Book



Almost all of us have purchased books at some point of our life, especially after the prevalence of online bookstores where we can easily buy books online without much effort, but there is a large section among us who could never read the books they purchased.
Or in other words, we all believe that it’s good to read books, and sometimes we (I mean those who could not develop the habit of reading) are not able to read books or develop the habit of reading books, despite putting in our best efforts.
Yes, it happens you start reading books and leave it in middle or can move after flipping through first few pages and you put in the shelf thinking you will read it some other time and the book is shelved for infinity. But it’s not that you did not want to read it, had it been the case why would you buy books online, you did attempt but could not move ahead.
It’s because you could not relate to the book you attempted reading and it really puts you off especially when you are not in a habit of reading.
The major issue is how to fix it, or how to get the ideal book for you.
It’s very simple.
Firstly try to discover your own interests, suppose while you were browsing through the online bookstores you were attracted to a particular book of crime and thriller genre, or romance genre, make note of it.
Now, try to read as many reviews as possible before you buy books online but read the reviews of the books of the genre which attracted you the most.
Then browse the online bookstores to find out the bestsellers in that particular genre. Go through the reviews of the bestsellers in your genre and try to figure out which one seems, simple, interesting and gives you a feeling that read it right away, you are done! Go ahead and buy that book at once!
Happy Reading!